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सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर बरेली सेंट्रल जेल से कैदी फरार

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लखनऊ। बरेली के इज्जतनगर स्थित केंद्रीय कारागार की सुरक्षा व्यवस्था उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब उम्रकैद की सजा काट रहा एक कैदी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर जेल से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों में खलबली मच गई। फरार कैदी की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें सक्रिय कर दी गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक फरार कैदी की पहचान अमरोहा जनपद के डिडौली थाना क्षेत्र निवासी दिनेश के रूप में हुई है। वह पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया गया था और सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था। सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे उसके जेल से गायब होने की जानकारी मिलने पर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। सूचना मिलते ही इज्जतनगर थाना पुलिस जेल प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पूरे परिसर की जांच की गई और आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान शुरू कराया गया। पुलिस ने फरार कैदी की तलाश में कई टीमों को लगाया है। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के संकेत मिलने पर जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हेड जेल वार्डर विशंभर सिंह, अर्जुन प्रसाद, गेंदालाल, मुकेश कुमार, मोहित कुमार तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विजय कुमार और यशपाल को निलंबित कर दिया।
जेल प्रशासन की ओर से इज्जतनगर थाने में फरार कैदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. साथ ही पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि कैदी के फरार होने के कारणों और सुरक्षा चूक के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। इस घटना ने सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कड़ी निगरानी और सुरक्षा के बीच एक उम्रकैद का कैदी जेल से बाहर निकलने में कैसे सफल हो गया। यह मामला जेलकर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। उधर इस संबंध में जेल अधीक्षक अविनाश से बात करने का प्रयास किया तो उनका भी फोन नहीं उठा।

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अधीक्षक और जेलर पर नहीं होगी कोई कार्यवाही
बरेली सेंट्रल जेल से कैदी के मामले में अधीक्षक और जेलर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह चर्चा विभागीय अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। चर्चा है कि बरेली सेंट्रल जेल अधीक्षक और जेलर को एआईजी जेल प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। विभाग में एआईजी जेल का संरक्षण प्राप्त दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की ही नहीं जाती है। जबकि जनवरी माह में कन्नौज और अयोध्या जेल से दो दो बंदियों की फरारी के मामले में दोनों जेल अधीक्षक और जेलर समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित किया गया था। उधर इस संबंध में जब एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। भेजे गए मैसेज का भी उन्होंने कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।

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